पति के लिए एक पत्नी जान भी दे सकती है, यही बताती है Rani Padmavati की कहानी

पति के लिए एक पत्नी जान भी दे सकती है, यही बताती है Rani Padmavati की कहानी

साल 2018 में आई दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह और शाहिद कपूर जैसे दिग्गज सितारों से सजी फिल्म Padmaavat तो आपने देख ही ली होगी। फिल्म में चित्तौड़ की Rani Padmavati के बारे में सब जान भी गए होंगे और अच्छा भी है क्योंकि इतिहास में Rani Padmini यानी पद्मावती की कहानी अमर है लेकिन बहुत से लोगों का ये भी कहना है कि इतिहास में पद्मावती नाम की कोई रानी थी ही नहीं ये सब मोहम्मद जायसी की कविता का काल्पनिक चरित्र है जिसे उन्होंने ऐतिहासिक बता दिया है।

फिर भी चित्तौड़ और सिंघल में महारानी पद्मावती के कुछ निशान आज भी पाए जाते हैं। अब सही है या गलत इतिहास में Rani Padmini  की कहानी को बच्चे पढ़ते हैं क्योंकि ये उनके सिलेबस में आता है। यहां रोचक सफर में हम आपको उनके बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य बताने जा रहे हैं।

जानिए Rani Padmavati का इतिहास

Rani Padmavati एक महान रानी थी जिनकी सुंदरता के आगे बड़े-बड़े फेल थे। कई राज्यों के राजा इनके साथ शादी करना चाहते थे लेकिन इन्हें अपने क्षत्रिय होने पर गर्व था और ये अपने जैसे ही पुरुष की तलाश में थीं। इस लेख में मैं आपको सदी की इस महान रानी के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने पति वीरगती की प्राप्त होने के बाद उन्होंने खुद जौहर कर लिया था। चलिए बताते हैं आपको इनके बारे में कुछ बातें-

1. 13वीं शताब्दी में सिंघल के राजा गंधर्वसेन के घर एक पुत्री ने जन्म लिया जिसका नाम पद्मावती रखा गया। इनकी मां का नाम चंपावती था और बचपन से ही ये बेहद खूबसूरत थीं।

2. महाराज गंधर्व ने अपनी पुत्री Rani Padmavati के लिए स्वंयवर रखा और उसमें देश के कई महान राजों ने भाग लिया था। उन्ही राजाओं में से एक थे रावल रत्न सिंह, जिन्होंने सभी को परास्त करके पद्मावती का मन जीत लिया था।

Rani Padmavat
Rani Padmavat

3. राजा गंधर्व ने अपनी पुत्री पद्मिनी की शादी राजा रावल रत्न सिंह के साथ धूमधाम से करवा दी। फिर रत्न सिंह उन्हें अपने राज्य चित्तौड़ ले आए।

4. रावल रतन सिंह की पहले से 13 रानियां थीं लेकिन वे सबसे ज्यादा प्यार पद्मावती से करते थे क्योंकि वे बेहद खूबसूरत थीं और उनके जैसी महिला राजा ने आज तक नहीं देखी थी।

5. राज्य में सबकुछ ठीक चल रहा था और उस समय चित्तौड़ के दरबार में राघव चेतन नाम के एक संगीतकार और महाज्ञानी थे। उनके संगीत में एक जादू था जिससे सभी मदहोश हो जाते थे। मगर उनकी एक बुरी हरकत ने रावल रतन सिंह को मजबूर कर दिया था।

6. एक दिन रावल रतन सिंह ने उग्र होकर उसका मुंह काला करके गधे पर बैठाकर निर्वासित कर दिया। रतन सिंह की इस कठोर सजा के कारण राघव चेतन राजा रावल रतन सिंह का दुश्मन बन गया।

7. अपमान से नाराज होकर वो दिल्ली चला गया और अलाउद्दीन खिलजी को चित्तौड़ पर आक्रमण करने के लिए उक्साया। अलाउद्दीन खिलजी को खूबसूरत महिलाओं का नशा था और जब राघव चेतन ने Rani Padmavati की खूबसूरती के बारे में खिलजी को बताया तो वो उन्हें देखने के लिए व्याकुल हो गया था।

Rani Padmavat
Image Courtesy : webduniya

8.  Rani Padmavati को हासिल करने के लिए अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना के साथ चित्तौड़ पर हमला करने पहुंच गया। बस वो पद्मावती की एक झलक पाना चाहता था लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था। कई महीनों तक उसने चित्तौड़ किले के सामने ही डेरा बनाकर इंतजार किया।

9. कई महीने गुजरने पर अलाउद्दीन ने रावल रतन सिंह के सामने झुकने की झूठी योजना बनाई और रावल रतन सिंह से मिलने का संदेश उनके दरबार में भेजा।

10 सुल्तान की बात सुनकर बिना लड़ाई-झगड़े के बात खत्म करने के लिए रावल रतन सिंह तैयार हो गए। उन्होंने खिलजी को दावत पर बुलाया लेकिन उसने वापस जाने के लिए एक शर्त रख दी कि वो एक बार महारानी पद्मावती को देख ले फिर चला जाएगा।

11. रावल रतन सिंह इस बात के लिए तैयार नहीं हुए लेकिन Rani Padmavati ने इस बात को खत्म करने के लिए उन्हें मना लिया। फिर जब खिलजी के सामने पद्मावती को लाया गया तो उसने उनकी झलक पानी के प्रतिबिम्ब के रूप में देखी।

12. एक प्रतिबिम्ब को देखकर ही वो पागल हो गया और वहां से जाने के बाद मन बनाया कि वो अब युद्ध में Rani Padmavati को जीतकर ही जाएगा। छल से खिलजी ने रावल रत्न सिंह को अपने पास दावत पर बुलाया और उन्हें बंदी बना लिया।

Rani Padmavat
Rani Padmavat

13. बंदी बनाने पर खिलजी ने शर्त रख दी कि पद्मावती ही अपने पति को छुड़ाने आएं तभी वो उन्हें जिंदा छोड़ेगा। Rani Padmavati अपनी 100 दासियों के साथ दिल्ली खिलजी के किले में पहुंची।

14. खिलजी की पत्नी ने उनका स्वागत किया और वो जानती थी कि खिलजी अभी भी रावल रतन को छोड़ेगा नहीं बल्कि मार देगा। इस वजह से खिलजी की पत्नी ने पद्मावती को एक सुरंग के जरिए उनके पति के साथ भिजवा दिया।

15. गुस्से में आकर खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया और एक के बाद एक सभी को मार गिराया। इस युद्ध में रावल रत्न सिंह वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन युद्ध में भेजने से पहले महारानी पद्मावती ने अपने पति से जौहर की आज्ञा ली थी, जिसके लिए रावल रत्न सिंह ने बहुत मुश्किल हां बोला था।

16. जब सभी पुरुषों को खिलजी ने मार गिराया तो महारानी ने जौहर करने की तैयारी की और उनकी सभी दासियां सहित चित्तौड़ की महिलाओँ ने अपनी आबरू बचाने के लिए Rani Padmavati के साथ अग्नी से भभकती हुई ज्वाला में आत्मदाह कर लिया।

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