राजनीति नहीं इस क्षेत्र की चाहत रखते थे Rahul Gandhi, जानिए इनकी 11 खास बातें

राजनीति नहीं इस क्षेत्र की चाहत रखते थे Rahul Gandhi, जानिए इनकी 11 खास बातें

Rahul Gandhi in Hindi- लोकसभा चुनाव-2019 खत्म हो गया है और ऐसे में पूरा देश नरेंद्र मोदी की गाथा गा रहा है. PM Narendra Modi ने अपने नेतृत्व में बीजेपी को जिस मुकाम पर पहुंचाया है वो काबिल-ए-तारीफ है. नरेंद्र मोदी के विपक्ष में खड़े कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने हिसाब से खूब मेहनत की. इस बार के उनके सभी भाषण खूब पॉपुलर हुए लेकिन एक बार फिर किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया. फिर भी Rahul Gandhi को मेहनतर करनी है और वे इससे पीछे नहीं हटेंगे ऐसा उन्होंने कहा है. राहुल अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं जो कि राजनीति में कार्यरत है. राहुल गांधी नेशनल यूथ यूनियन और राष्ट्रीय युवा कांग्रेस के चेयरमैन भी हैं. अक्सर लोग सोशल मीडिया पर rahul gandhi news सर्च करते हैं क्योंकि सच में लोग उनके बारे में जानना चाहते हैं.

Rahul Gandhi in Hindi, जानिए

आज रोचक सफर पर हम आपको Rahul Gandhi in Hindi बताने जा रहे हैं जो देश खान पहचान बनाना चाहते हैं लेकिन जनता उन्हें मौका नहीं दे रही. मगर वे पीछे नहीं हट रहे और उनकी ये मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी.

1. राहुल गांधी का जन्म 19 जून, 1970 को दिल्ली में देश के मशहूर गांधी-नेहरू परिवार में हुआ था उनकी मां श्रीमती सोनिया गांधी जो अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष हैं, पिता स्वर्गीय राजीव गांधी पूर्व प्रधानमंत्री थे और बड़ी बहन प्रियंका गांधी ने भी अब राजनीति की कमान संभाली है.

2. Rahul Gandhi Education के बारे में अगर बात करें तो उनकी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से हुई और इन्होंने प्रसिद्ध दून विद्यालय में भी कुछ समय तक पढ़ाई की. साल 1989 में उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टईफेंस कॉलेज में एडमिशन लिया था.

3. राहुल गांधी ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय के रोलिंस कॉलेज फ्लोरिडा से साल 1994 में अपनी कला स्नातक की उपाधि ली और इसके बाद उन्होंने साल 1995 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट स्टडीज में एम.फ़िल. की उपाधि ली.

Rahul Gandhi
Image Courtesy : DNA India

4. राहुल गांधी को घूमने-फिरने और खेलकूद खूब शौक रहा है. उन्होंने तैराकी, साईलिंग और स्कूबा-डायविंग की और स्वैश खेला है. राहुल ने बॉक्सिंग सीखी और पैराग्लाइडिंग की भी ट्रेनिंग ली. ऐसा कहा जाता है कि राहुल गांधी के ज्यादातर शौक उनके पिता की तरह ही रहे हैं.

5. राहुल गांधी हमेशा सुरक्षाकर्मियों से घिरे रहे हैं, लेकिन वे आम आदमियों की तरह जीवन जीना चाहते थे जिसका उन्हें कभी मौका नहीं मिला. राहुल गांधी ने एक बार कहा था, “अमेरिका में पढ़ाई के बाद मैंने जोखिम उठाया और अपने सुरक्षा गार्डो से निजात पाई जिससे मैं इंग्लैंड में आम जिंदगी सकूं.”

6. विदेश में राहुल करीब 10 साल रहे और देश वापस आने पर साल 2002 के अंत में उन्होंने देश की व्यावसायिक राजधानी मुंबई में एक इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिग फर्म, बेकॉप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड बनाई थी. रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में दर्ज आवेदन के अनुसार, इस कंपनी का मकसद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को सलाह और सहायता करना, सूचना प्रौद्योगिकी में परामर्शदाता और सलाहकार की भूमिका निभाना और वेब सॉल्यूशन देना था.

7. साल 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग को हलफनामे दिए, उसके मुताबिक बेकॉप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में राहुल गांधी की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत थी, हालांकि सियासत के कारण वे अपने कारोबार को आगे नहीं बढ़ा पाए.

Rahul Gandhi
Image Courtesy : News18

8. राहुल गांधी ने राजनीति में भी कदम अचानक ही रखा. साल 2003 में राहुल को अक्सर कांग्रेस की बैठकों और सार्वजनिक समारोहों में देखा गया और एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट श्रृंखला देखने के लिए एक सद्भावना यात्रा पर वह अपनी बहन प्रियंका गांधी के साथ पाकिस्तान भी भेजे गए थे. इसके बाद जनवरी 2004 में उन्होंने अपने पिता के पूर्व निर्वाचन क्षेत्र अमेठी का भी दौरा किया.

9. साल 2006 में आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुए कांग्रेस के एक सम्मेलन में पार्टी के हजारों सदस्यों ने राहुल गांधी से पार्टी में और महत्वपूर्ण नेतृत्व की भूमिका निभाने की गुजारिश की थी. राहुल गांधी को 24 सितंबर 2007 में पार्टी सचिवालय के एक फेरबदल में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का महासचिव नियुक्त किया गया.

10 राहुल गांधी को युवा कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ की जि‍म्मेदारी सौंपी गई और साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 21 जीत हासिल की.

11. राहुल गांधी को 19 जनवरी, 2013 में कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाया गया और इससे पहले कांग्रेस में उपाध्यक्ष का पद नहीं होता था, लेकिन पार्टी में उनका महत्व बढ़ाने और उन्हें सोनिया गांधी का सबसे खास सहयोगी बनाने के लिए पार्टी ने उपाध्यक्ष का चयन हुआ.

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