हिंदू धर्म के अलावा भी कुछ धर्म गाय को मानते हैं पवित्र, जानिए क्या है वजह

Cow

आज जिस तरह से गाय पर इतनी घटिया राजनीति हो रही है उसे तो देखकर शर्म ही आती है, आखिर कुछ लोग सिर्फ गाय को ही क्यों खाना चाहते है, क्या वह इसी तरह से सूअर भी खा सकते है और मीडिया ने तो हमेशा की तरह अपना दलाली भरा चेहरा ही दिखाया है, लेकिन मित्रो आज हम इन लोगो के बारे में बात न करके यह जानेंगे की आखिर गाय को इतना पवित्र को माना जाता है.

धरती पर गाय एक मात्र ऐसा प्राणी है जो केवल कार्बन डाई ऑक्साइड लेता है और ऑक्सीजन छोड़ता है, हिन्दू धर्म में गाय के दूध को अमृत तुल्य माना गया है और वास्तव में है भी , गाय का दूध सब से ज्यादा पोस्टिक एवं पाचक होता है , जो माँ अपने नवजात बच्चों को अपना दूध पिलाने में असमर्थ होती है , तो उन नवजात बच्चों को गाय का दूध ही पिलाया जाता है क्योकि गाय का दूध इतना सुपाच्चय और हल्का होता है की उसको छोटा बच्चा भी पचा लेता है.

गौ रक्षा का मामला देश के आर्थिक विकास से जुड़ा है. भैंस की तुलना में गाय के दूध में पौष्टिक तत्व ज्यादा होते हैं. गाय भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी रही है. पशुपालक बहुत कम खर्चे में गाय का पालन कर लेते हैं, हिन्दू धर्म में पवित्र गाय को कामधेनु कहा गया है. हिन्दुओ की धार्मिक आस्था के अनुसार गाय में सभी देवी देवता निवास करते है.

हिन्दू धर्म में गाय क्यों पूजनीय है :

पवित्र गाय
Image Courtesy : Cranium Bolts

भगवान कृष्ण ने श्रीमद् भगवतगीता में कहा है ‘धेनुनामसिम’ मैं गायों में कामधेनु हूं?

‘चाहे मुझे मार डालो पर गाय पर हाथ न उठाओ’ : बाल गंगाधर तिलक.

गोबर गैस संयंत्र में गैस प्राप्ति के बाद बचे पदार्थ का उपयोग खेती के लिए जैविक (केंचुआ) खाद बनाने में होता है.

एक तोला (10 ग्राम) गाय के घी से यज्ञ करने पर एक टन आँक्सीजन बनता है.

गाय के गोबर से भगवान शिव का प्रिय श्री सम्पन्न ‘बिल्वपत्र’ की उत्पत्ति हुई है.

गाय की रीढ़ में स्थित सुर्यकेतु नाड़ी से सर्वरोगनाशक, सर्वविषनाशक होता है.

देशी गाय के एक ग्राम गोबर में कम से कम 300 करोड़ जीवाणु होते है?

गाय के दूध में कैलिशयम 200 प्रतिशत, फास्फोरस 150 प्रतिशत, लौह 20 प्रतिशत, गंधक 50 प्रतिशत, पोटाशियम 50 प्रतिशत, सोडियम 10 प्रतिशत, खनिज पाए जाते है.

गाय के दूध में विटामिन C 2 प्रतिशत, विटामिन A (आई.क्यू) 174 और विटामिन D 5 प्रतिशत पाए जाते है.

गाय के घी से हवन पर “रूस” में वैज्ञानिक प्रयोग किया गया.

गाय के बारे में विभिन्न महा पुरषो के वचन :

ईसा मसीह “एक गाय को मरना, एक मनुष्य को मारने के समान है”

प्रसिद् मुस्लिम संत रसखान के अनुसार “यदि पशु के रूप में मेरा जन्म हो तो मैं बाबा नंद की गायों के बीच में जन्म लूं”

पं. मदन मोहन मालवीय जी की अंतिम इच्छा “भारतीय संविधान में सबसे पहली धारा सम्पूर्ण गौवंश हत्या निषेध की बने”

पंडित मदन मोहन मालवीय के अनुसार “यदि हम गायों की रक्षा करेंगे तो गाय हमारी रक्षा करेंगी”

स्कन्द पुराण अनुसार “गौ सर्वदेवमयी और वेद सर्वगौमय है”

महर्षि अरविंद के अनुसार “गौ’ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की धात्री होने के कारण कामधेनु है| इसका अनिष्ट चिंतन ही पराभव का कारण है”

भगवान राम के पूर्वज महाराज दिलीप भी नन्दिनी की पूजा करते थे. उन्हीं की कृपा से उनका वंश उन्नति को प्राप्त हुआ. महर्षि वशिष्ट के आश्रम में भी कामधेनु उनकी समस्त आवश्यकताओं को पूर्ण करती थीं. विश्वामित्र इसी कामधेनु को प्राप्त करने के लिये वशिष्ठ पर नारायणस्त्र, ब्रह्मास्त्र व पाशुपतास्त्र का संधान किया था परंतु कामधेनु के आशीष से सभी अस्त्र-शस्त्र निर्मूल सिद्ध हुए थे.

भगवान शिव का वाहन नंदी दक्षिणी भारत के ओंगलें नामक नस्ल का सांड था. जैन आदि तीर्थ कर भगवान ऋषभदेव का चिन्ह बैल था.

तुलसीदास जी के अनुसार धर्म-अर्थ, काम व मोक्ष चारों फल गाय के चार थन रूप हैं. हिन्दू शास्त्रों में व जैन आगमों में कामधेनु को स्वर्ग की गाय कहा है. गाय को ‘अवध्या’ माना है.

भगवान महावीर के अनुसार ‘गौ रक्षा’ बिना मानव रक्षा संभव नहीं है.

पैगाम्बर हजरत मोहम्मद ने कहा है की ‘गाय का दूध रसायन, घी अमृत व मांस बीमारी है तथा गाय दौलत की रानी है.

ईसा मसीह ने कहा है कि एक बैल को मारना एक मनुष्य को मारने के समान है.

स्वामी दयानंद सरस्वती ‘गौ करुणानिधि’ में कहते हैं कि ‘एक गाय अपने जीवन काल में 4,10,440 लाख मनुष्यों हेतु एक समय का भोजन जुटाती है. जबकि उसके मांस से 80 मांसाहारी केवल एक समय अपना पेट भर सकते हैं.

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने कहा था कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कलम की नोक से गोहत्या पूर्ण बंद कर दी जाएगी.

प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था भारत में गोपालन सनातन धर्म है.

पूज्य देवराहा बाबा के अनुसार जब तक गौमाता का खून इस भूमि पर गिरता रहेगा, कोई भी धार्मिक व सामाजिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं होगा. कोई भी धार्मिक व सामाजिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं होगा.

स्व. जयप्रकाश नारायण ने कहा था, हमारे लिये गोहत्या बंदी अनिवार्य है. गाय के वैज्ञानिक महत्व को प्रतिपादित करने वाले अनेक शोध निष्कर्ष विज्ञान की कसौटी पर खरे उतरे हैं.

रूसी वैज्ञानिक शिरोविच के अनुसार गाय के दूध में रेडिया विकिरण से रक्षा करने की सर्वाधिक शक्ति होती है एवं जिन घरों में गाय के गोबर से लिपाई पुताई होती है, वे घर रेडियों विकिरण से सुरक्षित रहते हैं. गाय का दूध ह्दय रोग से बचाता है.

गाय के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य :

Image Courtesy : PBS

आलस्यहीनता व स्मरण शक्ति बढ़ाता है. गाय व उसकी संतान के रंभने से मनुष्य की अनेक मानसिक विकृतियां व रोग स्वत: ही दूर होते हैं. मद्रास के डॉ. किंग के अनुसंधान के अनुसार गाय के गोबर में हैजे की कीटाणुओं को नष्ट करने की शक्ति होती है. टी.वी. रोगियों को गाय के बाड़े या गौशाला में रखने से, गोबर व गोमूत्र की गंध से क्षय रोग (टीवी) के कीटाणु मर जाते हैं.

एक तोला गाय के घी से यज्ञ करने पर एक टन आक्सीजन (प्राणवायु) बनती है. रूस में प्रकाशित शोध जानकारी के अनुसार कत्लखानों से भूंकप की संभावनाएं बढ़ती हैं. शारीरिक रूप से गाय की रीड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती हैं जो सूर्य के प्रकाश में जाग्रत होकर पीले रंग का केरोटिन तत्व छोड़ती है. यह तत्व मिला दूध सर्व रोग नाशक, सर्व विष नाशक होता है.
गाय के घी को चावल से साथ मिलाकर जलाने से अत्यंत महत्वपूर्ण गैस जैसे इथीलीन आक्साइड गैस जीवाणु रोधक होने के कारण आप्रेशन थियेटर से लेकर जीवन रक्षक औषधि बनाने के काम आती है.

वैज्ञानिक प्रोपलीन आक्साइड गैस कृत्रिम वर्षा का आधार मानते हैं. इसलिये यज्ञ करना पाखंड नहीं अपितु पूर्ण वैज्ञानिक होते हैं. भारतीय गौवंश के मूत्र व गोबर से तैयार लगभग 32 औषधियों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र व राजस्थान आदि सरकारों से मान्यता प्राप्त हैं.

गाय के गोमूत्र में तांबा होता है. जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर स्वर्ण में परिवर्तन हो जाता है. व स्वर्ण में सर्व रोगनाशक शक्ति होती है. गोमूत्र में अनेक रसायन होते हैं. जैसे नाइट्रोजन कार्बोलिक एसिड, दूध देती गाय के मूत्र में लैक्टोज सल्फर, अमोनिया गैस, कापर, पौटेशियम, यूरिया, साल्ट तथा अन्य कई क्षार व आरोग्यकारी अमल होते हैं.

गाय के गोबर में 16 प्रकार के उपयोगी खनिज पाये जातें हैं. गोमूत्र में आक, नीम व तुलसी आदि उबालकर, कई गुना पानी में मिलाकर बढ़िया कीट नियंत्रण बनते हैं.

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