देश के लिए मर मिटने वाले ‘नेताजी’ सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 15 अनसुनी बातें

सुभाष चंद्र बोस
Image Courtesy : iChowk

‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा’, ये नारा हम बचपन से सुनते आ रहे हैं और यह भी जानते हैं कि इस नारे को सबसे पहले सुभाष चंद्र बोस से सुना गया था. बोस जी को सभी ‘नेता जी’ के नाम से भी संबोधित करते थे और वे हमेशा अपने कर्मों की वजह से देशवासियों के दिलों में रहेंगे. उस समय किसी को होश नहीं था, सबतो आजादी मिली, नया संविधान बना. कई सरकारें आईं और चली गईं लेकिन किसी ने भी नेताजी की सुध-बुध नहीं ली. उनकी मौत आज भी एक रहस्य है जिसे किसी ने सुलझाने की कोशिश नहीं की.

सुभाष चंद्र बोस
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सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी के लिए बहुत से कदम उठाये और किसी की परवाह ना करते हुए आगे बढ़ते गये. फिर भी आज हम उनके द्वाारा और कई क्रांतिकारियों के बलिदान को भूल से गये हैं. आज नेता जी को याद करते हुए हम आपको रोचक सफर में Subhash Chandra Bose in Hindi बताने जा रहे हैं जिसके बारे में अधिकतर लोगों को नहीं मालूम ना होगा..

1. आजाद हिंद फौज का गठन करके अंग्रेजों की नाक में दम करने वाले फ्रीडम फाइटर सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को उडीसा के कटक शहर में हुआ था.

2. सुभाष चन्द्र बोस अपनी माता-पिता की 14 सन्तानों में से नौवीं सन्तान थे.

3. सुभाषचंद्र बोस ने भारतीय स्‍वतंत्रता संग्राम के सेनानी भगत सिंह की फांसी रुकवाने का भरसक प्रयत्‍न किया. उन्‍होंने गांधी जी से कहा कि वह अंग्रेजों से किया अपना वादा तोड़ दें लेकिन वह भगत सिंह को बचाने में नाकाम रहे.

4. उनके पिता की इच्छा थी कि सुभाष आई.सी.एस. अधिकारी बनें. उन्होंने अपने पिता की यह इच्छा करते हुए साल 1920 की आई.सी.एस. परीक्षा में चौथा स्थान पाया. मगर नेता जी का मन अंग्रेजों के अधीन काम करने का नहीं था. 22 अप्रैल, 1921 को उन्होंने इस पद से त्यागपत्र दे दिया.

5. साल 1933 में उन्हें देश निकाला दे दिया गया, साल 1934 में पिताजी की मृत्यु होने पर काँग्रेस के (लखनऊ) अधिवेशन में भाग लेने के लिए सुभाष चन्द्र बोस दो बार भारत आए. मगर दोनों ही बार ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर वापस देश से बाहर भेज दिया.

6. सबसे पहले गाँधीजी को राष्ट्रपिता कह कर सुभाष चंद्र बोस ने ही संबोधित किया था.

7. साल 1938 में सुभाष चन्द्र बोस कांग्रेस के अध्यक्ष हुए. अध्यक्ष पद के लिए गांधी जी ने उन्हें चुना था. गांधी जी तथा उनके सहयोगियों के व्यवहार से दुःखी होकर अन्ततः सुभाष चन्द्र बोस ने 29 अप्रैल, 1939 को कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया.

8. एक समय ऐसा था जब लौह पुरुष सरदार पटेल ने सुभाषचंद्र बोस के खिलाफ मामूली संपत्ति के लिए मुकदमा किया था, जबकि सच्‍चाई यह थी कि वह केवल गांधी के सम्‍मान में सुभाष को नीचा दिखाना चाहते थे.

9. अपने जीवनकाल में नेताजी को कुल 11 बार कारावास की सजा काटनी पड़ी. आखिरी बार 1941 को उन्‍हें कलकत्ता कोर्ट में पेश होना था लेकिन नेताजी अपने घर से भागकर जर्मनी चले गए और हिटलर से मुलाकात की.

10. सुभाषचंद्र बोस जी को नेताजी कहने वाला पहला शख्स एडोल्फ हिटलर ही था.

11. सुभाषचंद्र बोस 1934 में अपना इलाज करवाने आस्‍ट्रि‍या गए थे जहां उनकी मुलाकात एक एमिली शेंकल नाम की टाइपिस्‍ट महिला से हुई. नेताजी इस महिला से अपनी किताब टाइप करवाने के लिए मिले थे. इसके बाद नेताजी ने 1942 में इस महिला से शादी कर ली.

12. नेताजी ने दुनिया की पहली महिला फौज का गठन किया था.

13. नेताजी की मौत के संबंध में अब तक मिले साक्ष्‍यों के आधार पर नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू एयरपोर्ट पर उनके विमान के क्रेश होने से हुई थी. हालांकि इस बारे में पुख्‍ता जानकारी अभी तक आम लोगों के लिए जारी नहीं की गई हैं. ये तथ्य आज भी फाईलों में दफ़न हैं.

14. नेताजी सुभाष चंद्र बोस को साल 1992 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया लेकिन ये बाद में वापिस ले लिया.

15. कुछ साल पहले ये खबर आई थी कि नेता जी की मौत जापान के पास हुई थी और वहां के रैंकोजी मंदिर में एक पुजारी ने उनकी अस्थियों को  आज भी संभाल कर रखा हुआ है.

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